कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां
सेब के बगीचों में बागवानों द्वारा चूने का इस्तेमाल लम्बे समय से किया जा रहा है | फिर चाहे वह तने में लगाने वाला चूना हो या फिर तौलिये में मिलाने वाला, दोनों ही लाभप्रद हैं | आज हम मिट्टी में मिलाये जाने वाले चूने के विषय के बारे चर्चा करेंगे और जानेंगे कि पौधे के तौलिये में चूने का प्रयोग क्यों, कब और कैसे किया जाना चाहिए ?
चूने का प्रयोग सेब के तौलिये में मुख्यतः मिट्टी के pH मान को बढ़ाने के लिए किया जाता है | हिमाचल के जुब्बल, रोहड़ू, कोटखाई आदि क्षेत्रों में मिट्टी का pH मान कम रिकार्ड किया गया है | अम्लीय मिट्टी में अक्सर कैल्शियम और मैगनिशिम की कमी रहती है | इसके अतिरिक्त अम्लीय मिट्टी में फफूंद बैक्टेरिया से होने वाली बीमरियों का प्रकोप भी अधिक रहता है | अतः उच्च पैदावार लेने हेतु इस अम्लीयता को ठीक करना नितांत आवश्यक है | लेकिन यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि चूने की अधिक मात्रा के उपयोग से पौधे में मेगनिज़, जिंक, कॉपर व आयरन जैसे पोषक तत्वों की कमी हो सकती है | अतः चूने का प्रयोग मिट्टी की जाँच के उपरांत ही किया जाना चाहिए | यदि मिट्टी का pH मान 5.8 से कम हो तो चूने का इस्तेमाल कर लेना चाहिए |
इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बागीचे में केवल बुझे हुए चूने का प्रयोग किया जाए | चूने के कण जितने बारिक होंगे वह उतना ही असरदार सिद्ध होगा | अतः कोशिश यह की जानी चाहिए कि महीन पाउडर वाले चूने का इस्तेमाल हो | इसमें कैल्शियम कार्बोनेट अथवा डोलोमाईट चूने का प्रयोग किया जा सकता है |
तौलिये में चूने डालने का समय दिसंबर-जनवरी के दौरान उपयुक्त रहता है | चूने को पूरे तौलिये में फैला कर मिट्टी में अच्छी तरह से लगभग 20 सेंटीमीटर तक मिला लें | मिलाने से पहले यह सुनिश्चित करें कि मिट्टी में पर्याप्त मात्रा में नमी हों |
नया बागीचा लगाने से पहले मिट्टी की जाँच करवा लें और आवश्यकतानुसार ही गड्डे में चूना मिलाएं |



