क्यों जरुरी है मिट्टी की जाँच ?
प्रदेश में सेब के दौरान का सीजन की की ओर बढ़ रहा है और बागवान भाइयों ने भी सर्दियों में होने वाले कार्यों की तैयारियां शुरू कर दी है । इसी बीच अक्सर हमें फोन आते हैं कि बागीचे में कौन-कौन सी खाद डालनी चाहिए ?
प्रश्न छोटा सा है, लेकिन विषय महत्वपूर्ण है और गंभीर भी ।
आनन फानन में बागवानों को तुरंत सलाह दे दी जाती है कि 70:35:70 N:P:K के हिसाब से खाद डालें । हैरानी की बात यह है कि हमें यह पता ही नहीं कि उस पेड़ में कितने फल लगने हैं, उसे कितने पोषक तत्वों की आवश्यकता है, मिट्टी में पोषक तत्वों की स्थिति क्या है आदि बातों को बिना जाने पौधों में उर्वरकों को डालना कदापि उचित नहीं । पौधे की उम्र के हिसाब से इसमें खाद डालना, इसकी अनुशंसा (Recommendation) पर सवालिया निशान खड़ा करता है ।
सबसे महत्वपूर्ण पहलू है मिट्टी की जांच करना ।
जैसे ही तुड़ान समाप्त हो जाता है, हमें मिट्टी परीक्षण जरूर करवा लेना चाहिए । ऐसा ना हो हम उर्वरक डालते ही जा रहे हों और पौधा उन्हें ग्रहण ही ना कर पा रहा हो ।
क्या आपने CEC यानी कैटायन एक्सचेंज कैपेसिटी के बारे में सुना है ? यह मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को मापने का एक महत्वपूर्ण पैमाना है । जो पौधों को कैल्शियम, मैग्नीशियम व पोटाश जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की उपलब्धता सुनिश्चित करता है । यदि मिट्टी में नेगेटिव चार्ज वाले कण कम है (जैसे की रेतीली मिट्टी) तो कैल्शियम, मैग्नीशियम व पोटाश आदि तत्वों के लीचिंग की संभावनाएं काफी अधिक रहती है । इसके विपरीत यदि मिट्टी में नेगेटिव चार्ज वाले कणों की मात्रा बढ़ जाए तो नेगेटिव चार्ज वाले पोषक तत्व जैसे नाइट्रेट, सल्फेट और क्लोराइड की लीचिंग की संभावनाएं बढ़ जाती है । इसलिए संतुलन बनाये रखना बहुत जरूरी है ।
जिस मिट्टी की CEC अधिक होती है (जैसे कि चिकनी मिट्टी), उसमें पानी को hold करने की क्षमता अधिक रहती है । इसके विपरीत जिस मिट्टी का CEC कम रहता है उसमें पानी को होल्ड करने की क्षमता भी बहुत कम रहती है ।
दूसरे महत्वपूर्ण पहलू हैं pH, EC और OC . इनमें यदि थोड़ी सी भी गड़बड़ हो जाये तो हमारी सारी मेहनत पर पानी फिर सकता है । pH की महत्वत्ता पर हम अपनी अन्य पोस्ट पर चर्चा कर चुके हैं । जिसका लिंक इस पोस्ट के अंत में दिया गया है ।
समय-समय पर मिट्टी की जांच करवाते रहना अत्याधिक महत्वपूर्ण है, कहीं ऐसा ना हो जाए कि हम बगीचे में महंगी खादों का इस्तेमाल किये जा रहे हों और पौधा उन्हें न ले पा रहा हो । हम अपनी अगली पोस्ट में मृदा परीक्षण से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण व रोचक पहलुओं पर चर्चा करेंगे ।



