फलों का जब हो छोटा आकर तो क्यों न करें इसका उपचार [भाग-1]
फलों की सेटिंग के बाद बागवान भाई अक्सर फलों के छोटे आकार के प्रति चिंतित रहते हैं | फलों के आकार के छोटा होने के कारण न सिर्फ पेटियों की संख्या में कमी आती है अपितु सेब की फसल का सही मूल्य भी नहीं मिल पता है | अतः बागवान भाइयों को चाहिए कि वे मीडियम से लार्ज आकार का सेब तैयार करके मार्केट में बेचें |
आज हम फलों के आकार की बढ़ोतरी में सहायक कारकों पर चर्चा करेंगें | इन कारकों का वर्णन संक्षिप्त रूप में निम्न प्रकार से है :
- बीमे के पत्तों का आकार : बीमे के नीचे वाले पत्ते सेब का आकार बनाने में अहम् भूमिका अदा करतें हैं | यदि ये पत्ते आकार में बड़े हो जाएँ तो निश्चित ही फल का आकार भी बड़ा बनेगा | जब कि इसके विपरीत यदि किसी कारणवश ( जैसे बीमारी, कीट, ओला आदि के प्रकोप से ) ये पत्ते छोटे रह गए तो फल का आकार भी छोटा ही रहेगा |
अक्सर देखा गया है कि फूल खिलने के 4-6 सप्ताह तक कोशिकाओं का विभाजन तेजी से होता है, उसके बाद विभाजित कोशिकाओं के आकार में बढ़ोतरी होना शुरू होती है | अतः यदि शुरूआती समय में फल छोटा रह गया तो बाद में बढ़ना मुश्किल हो जाता है |
स्पर के पत्तों का आकार मुख्यतः पेड़ में भंडारित भोजन पर निर्भर करता है | पौधे में सबसे पहले बीमे वाले पत्ते आना ही शुरू होतें हैं, तत्पश्चात फूल खिलने की प्रक्रिया प्रारंभ होती है | इतने में पौधे को समय ही नहीं मिल पता है कि वह नाइट्रोजन को जड़ों के माध्यम से अवशोषित कर पत्तों तक पहुचाये | ऐसे समय में, पेड़ में भंडारित भोजन ही बीमे के पत्तों द्वारा अपना आकार बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है |
इसके लिए कुछ बागवान फूलों के खिलने से पहले तथा तुडान के तुरंत बाद यूरिया की स्प्रे करते हैं | अतः आप भी बीमे के पत्तों की बढ़ोतरी हेतु अपने पौधों में भंडारित भोजन की पर्याप्त मात्रा बनाये रखें | - फलों की थिनिंग : अधिक फल सेटिंग की अवस्था में फलों की थिन्निंग की जानी चाहिए जिससे बचे हुए फल अच्छा आकार ले सकें | शुरूआती समय में की गयी थिनिंग न केवल फलों के आकार में वृद्धि करती है अपितु अगले वर्ष की फसल के लिए भी फूलों की initiation को बढ़ावा देती है | अतः पौधे की द्विवार्षिक बेअरींग (Biennial Bearing) जैसी समस्या से भी निजाद पाया जा सकता है |



