फ्रूट थिन्निंग : कब क्यों और कैसे?
भारत में सेब के फलों की थिन्निंग करना आम नहीं है , जब कि विदेशों में यह काफी प्रचलित है। हमारा अक्सर यह मानना होता है की अधिक से अधिक फल लगने चाहिए। दूसरी तरफ यह भी डर रहता है कि एक तरफ तो थिन्निग कर दी और कल को यदि ड्रापिंग हो गयी तो , रही सही कसर भी निकल जाएगी।
आज हम यह जानेगें कि फलों की थिन्निंग आखिर कब और क्यों करनी चाहिए ? यदि आपके बगीचे में फलों का उत्पादन औसत से 50% अधिक हो तो फलों की थिन्निंग कर लेनी चाहिए। यदि यह उत्पादन 25-30% ही अधिक हो तो थिन्निंग की आवश्यकता नहीं रहती। क्योंकि हमें भविष्य में होने वाली ड्रोपिंग को भी ध्यान में रखना होता है। खासकर क्लोनल रूटस्टॉक पर लगी स्पर किस्मों में अधिक फ्रूट सेट के चलते थिन्निंग की आवश्यता पड़ ही जाती है। हिमाचल में भी कुछ प्रगतिशील बागवान, (एक पेड़ पर कितने फल रखे जाने चाहिए, के लिए) फ्रूट गेज का इस्तेमाल कर रहें हैं।
अब बात आती है कि फ्रूट थिन्निंग करने का उपयुक्त समय क्या है ? यदि हमें प्लेनोफिक्स का इस्तेमाल कर रहें हों तो यह ध्यान रखना आवश्यक है कि पूरा फूल खिलने के 15 से 20 दिनों के भीतर यह स्प्रे हो जानी चाहिए। 45 मिली लीटर प्रति ड्रम के हिसाब से इसका अनुमोदन किया जाता है। यदि थिन्निंग हाथ से की जानी हो तो फलों का आकार जब मटर के दाने से थोड़ा बड़ा होने (10 mm) पर की जानी चाहिए।
देर से की गयी थिन्निंग अक्सर लाभदायक नहीं होती, क्योंकि फलों में पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा, निषेचन (Fertlization) के कुछ सप्ताह तक ही होती है। उन्हीं कुछ सप्ताहों तक कोशिकाओं का विभाजन होता है, तत्पश्चात यह विभाजन रूक जाता है और केवल कोशिकाओं के आकार में ही वृद्धि होती है। अतः जितनी अधिक कोशिकाएं होंगी, फलों का आकार उतना ही बढ़िया होगा। इसलिए फलों की थिन्निंग समय रहते कर लेनी चाहिए ।
आपको यह जानकार हैरानी होगी की अगले वर्ष के लिए कलियों का विभाजन इस वर्ष 1 से 15 मई के मध्य होना शुरू हो जाता है। इस समय पौधे को पोषक तत्वों की आवश्यकता काफी मात्रा में रहती है। यदि समय से थीनिंग न की जाये तो इन पोषक तत्वों का उपभोग दुसरे फल कर लेते हैं, जिससे अगले साल की फसल पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। अतः समय रहते आवश्यकतानुसार फ्रूट थिन्निंग अवश्य कर लें।




