मल्च एक फायदे अनेक
इस वर्ष बर्फवारी और बारिश कम होने के कारण जहाँ चीलिंग आवर पूरे न होने की चिंता सता रही है वहीँ दूसरी तरफ किसानों बागवानों को भविष्य में पानी की कमी होने का खतरा बना हुआ है। ऊँचे पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फ न पड़ने के कारण, निरंतर पानी की उपलब्धता करवाने वाले ग्लेशियर सिकुड़ कर रह गए हैं | यही कारण है कि बागवान भाइयों को अभी से ही पानी के उचित प्रबंधन के बारे में सोचना होगा।
पौधों को पानी की कमी न हो इसके लिए मल्चिंग करना एक उपयुक्त विकल्प रहेगा। इसमें पौधे के तौलिये को किसी भी कृत्रिम या प्राकृतिक सामग्री से ढक दिया जाता है। जिससे पौधे की उचित वृद्धि और विकास तो होता ही है साथ में यह मिट्टी के वातावरण को भी नियंत्रित करती है।
आज हम मल्चिंग से होने वाले फायदों पर चर्चा करेंगे :
- नमी सरंक्षण : मल्चिंग से मृदा की नमी को सरंक्षित किया जा सकता है, पानी के वाष्पीकरण न होने के कारण यह पौधे के लिए लम्बे समय तक उपलब्ध रहता है।
- तापमान नियंत्रण : मल्चिंग के इस्तेमाल से मिट्टी का तापमान नियंत्रित रहता है | जिससे जड़ों का उचित विकास होता है |
- खरपतवार (Weeds) नियंत्रण : मल्चिंग के रहते सूर्य का प्रकाश खरपतवार के बीजों को नहीं मिल पाता, साथ ही मल्चिंग की परत खरपतवारों को उगने ही नहीं देती।
- मिट्टी को नरम रखना : तौलिये के जिस भाग में मल्चिंग की जाती है वहां पर मिट्टी नरम/भुरभुरी रहती है, परिणामस्वरूप जड़ों के लिए हवा का आदान प्रदान बना रहता है।
- मिट्टी में कार्बन तत्व की बढोतरी: घास, पतियों आदि से की गयी मल्च समय के साथ साथ सड़ती जाती है जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता में बढोतरी होती है।
- मिट्टी के अपरदन (Erosion) को रोकना : खासकर ढलानदार क्षेत्रों में जहाँ पानी के तेज बहाव के कारण अक्सर मिट्टी बह कर चली जाती है वहीँ मल्चिंग से इसे बचाया जा सकता है।
मल्चिंग के लिए घास, पत्ते, छोटी छोटी टहनियां, तिनके आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी परत की मोटाई लगभग 4-5 इंच होनी चाहिए। इसके आलावा प्लास्टिक की मल्च का इस्तेमाल भी लाभप्रद रहता है। सेब के बगीचों में इस्तेमाल होनी वाली प्लास्टिक मल्च लगभग 200 GSM की होनी चाहिए। दोहरे रंग (सिल्वर और काली) वाली शीट का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। जिसमें चमकीली सतह ऊपर की तरफ और काली सतह नीचे तरफ रखना लाभदायक रहता है। आजकल मार्केट में मल्च मैट भी आ गयी है जिसके प्रयोग मल्चिंग से होने वाले सभी फायदे तो होते ही हैं, साथ में बारिश का पानी भी तौलियों में रिस जाता है।
इससे पहले कि देर हो जाये, बागवान भाई पौधों में मल्च का प्रयोग शीघ्र ही करना शुरू कर दें।




