सेब के पौधों में फ़लों का झड़ना (Fruit Dropping)

सेब के पौधों में फ़लों का झड़ना (Fruit Dropping)फ़्रुट ड्रापिंग सेब के बागवानों के लिये एक गंभीर समस्या बन चुका है | सेटिंग के बाद जैसे ही ड्रापिंग शुरु होती है, बागवान चिंतित होना शुरु जाते है | आज हम ड्रापिंग के मुख्य पहलुओं पर नज़र डालेंगे | ड्रापिंग मुख्यतः तीन प्रकार की होती है :
1). प्रथम ड्राप : कुछ फ़लों में परागण और निषेचन (Pollination and Fertilisation) प्रक्रिया पूरी न होने के कारण पंखुड़ीपात अवस्था (Petal Fall Stage) के बाद यह ड्राप हो जाता है | इसमें फ़ल की डंडी पीली पड़ना शुरु हो जाती है और वह गिर जाता है | शुरु में ऐसा प्रतीत होता है मानो सेटिंग बंपर हुई हो परन्तु इसे False Pollination कहा जाता है | फ़ुलों के खिलने के पांच सप्ताह के तक यदि पौधे को अच्छी धूप न मिले तो भी ड्रापिंग भारी मात्रा में होती है | हालांकी पांच सप्ताह के बाद फ़िर चाहे छाया क्यों न हो जाये इससे फ़्रुट ड्रापिंग में फ़र्क नहीं पड़ता |
इस ड्राप ने निज़ात पाने के लिये बागीचे में कम से कम 33% तीन प्रकार की परागण किस्में लगायें | मधुमक्खियों के बक्सों को बागिचों में रखें तथा पिंक कली अवस्था पर बोरोन का छिड़काव करें |
2). जून ड्राप : अक्सर बागवान के मन में यह भ्रांति रहती है कि जून ड्राप का मुख्य कारण सुखा पड़ना (Drought) है, लेकिन इसका मुख्य कारण पोषक तत्वों के प्रति बढ़ती प्रतिस्पर्धा है | इस अवस्था में जैसे-जैसे फलों का आकार बढ़ना शुरु होता है वैसे- वैसे उनकी पोषक तत्वों की जरुरत भी बढ़ती जाती है | अत: नाईट्रोजन, फोसफोरस, पोटाश, कैल्शियम, मैगनिशियम, सल्फर के अतिरिक्त सुक्ष्मतत्वों का पौधे की कली फ़ुटने से लेकर तुड़ान से 15 दिन पहले तक की अवस्था तक उपलब्ध करवाना अनिवार्य रहता है | तुड़ान के बाद दिये गये पोषक तत्व पौधे में रिजर्व भोजन का काम करता है |
3). फ़ल तोड़ने से पूर्व की ड्रापिंग : इसका मुख्य कारण जमीन में पर्याप्त मात्रा में नमी न होना व फ़लों का पकना रहता है | जैसे-जैसे फ़ल पकना शुरु होता है वैसे- वैसे इथिलिन नामक हार्मोन बनना शुरु हो जाता है | परिणामस्वरुप फल की डंडी व बीमे के बीच बनी परत टूट जाती है और फ़ल गिर जाता है | इस ड्राप को रोकने के लिये यदि संभव हो तो सिंचाई का प्रयोग करें और मल्चिंग का इस्तेमाल करें | प्लास्टिक मलच शीट के अतिरिक्त घास या फ़िर कायल (Pinus wallichiana) या देवदार की सुखी पतियों की 5-6 इंच मोटी मल्चिंग करें | चीड़ के पतियों की मल्चिंग न करें | इसके इलावा NAA 10 mg/lt (2 gram per drum) की स्प्रे इस ड्रोपिंग के शुरु होने से पहले कर लें | अन्यथा ड्रोपिंग के शुरु होने के बाद की गयी स्प्रे ज्यादा लाभप्रद नहीं रहती |
वैसे तो ड्रोपिंग को 100% तक रोक पाना मुश्किल है लेकिन फ़िर भी कुछ छोटी-छोटी, लेकिन महत्वूर्ण बातों का ध्यान रख कर हम इस पर काफ़ी हद तक काबू पा सकते हैं |

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