सेब में कैल्शियम की कमी के लकण ?
आज हम सेब के विकास में कैल्शियम की भूमिका पर चर्चा करेंगे | फल पौधों के विकास के लिए जिन पोषक तत्वों की आवश्यकता रहती है उनमें कैल्शियम का महत्वपूर्ण स्थान है | कैल्शियम मुख्यतः पौधे के पत्तों और लकड़ी में पाया जाता है | हालाँकि बीज और फलों में इसकी मात्रा पत्तों की अपेक्षा कम रहती है | आप को यह जानकार शायद हैरानी होगी कि सेब के पौधे को सभी 16 पोषक तत्वों में कैल्शियम की आवश्यकता सबसे अधिक रहती है |
जड़ों के विकास के लिए यह अत्यंत ही महत्वपूर्ण तत्व है | पौधे में इसकी कमी से जड़ों का विकास रुक जाता है और जड़ों का अग्रिम सिरा भूरे रंग का हो जाता है | कोशिकाओं की दीवारों का यह एक अभिन्न घटक है जिसकी वजह से फल थोड़े कठोर हो जाते हैं और तुडान के बाद लम्बे समय तक भंडारित किये जा सकते हैं | इसके अतिरिक्त यह तत्व पौधे की आंतरिक सरंचना और कामकाज में अहम् भूमिका अदा करता है |
कैल्शियम की कमी के लक्षण मुख्यतः नए पत्तों पर देखे जा सकते हैं | पत्ते ऊपर की तरफ मुड़े हुए होते हैं और पत्ते की नोक हुक के आकार में मुड़ जाती है | कई बार तो पौधे का उपरी सिरा ही मर जाता है और टहनी ऊपर से नीचे की तरफ सुखना शुरु हो जाती है | सेब के फलों में Bitter Pit अथवा Corky Spot के लक्षण देखे जा सकतें हैं |
जमीन में कैल्शियम का प्रयोग मिट्टी अथवा पत्तों की जांच के आधार पर ही करें | पत्तों में कैल्शियम की मात्रा 1.2 – 2.0 % के मध्य होनी चाहिए | अत्याधिक कैल्शियम के प्रयोग से मिटटी का pH मान बढ़ सकता है जिससे पौधे को जिंक और आयरन की उपलब्धता नहीं हो पाती है |
कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए 1 किलोग्राम कैल्शियम क्लोराइड की स्प्रे प्रति 200 लीटर पानी में घोल कर तुडान से 45 दिन पहले करें और दूसरी स्प्रे 15 दिनों बाद दोहराएँ | एक बात का विशेष ध्यान रखें कि सूखे की स्थिति में स्प्रे न करें | कैल्शियम नाइट्रेट खाद भी कैल्शियम की कमी को पूरा करने का एक अच्छा विकल्प है |



