अच्छी सेटिंग के लिए करे ये उपाय: [भाग-2]
पिछली भाग में हमने विषम परिस्थियों के चलते कृत्रिम परागकण विधि के माध्यम से अच्छी फसल लेने पर चर्चा की थी। जिसमें परागकण एकत्रित करने की विधि को बताया गया था।
Hand Pollination कैसे और कब की जाए, आज इस विषय पर चर्चा करेंगे। Hand Pollination अच्छी सेटिंग के लिए एक कारगर विधि है, खासकर ऐसे समय में जब मौसम अनुकूल न हों और न ही मधुमक्खियाँ उपलब्ध हों।
कांच के बर्तन में एकत्रित किये गए पोलन को कम वसा (Low Fat) वाले दूध के पाउडर में (1:2 अनुपात, 1 भाग पोलन और २ भाग पाउडर) मिला लें। इस पाउडर में वसा की मात्रा 1.5% होती है और यह बाज़ार में आसानी से मिल जाता है।
जब फूल खिल गएँ हों तो, सुबह के समय पोलन को छोटे ड्राइंग ब्रश (चित्रानुसार) अथवा उंगली से फूल के मादा भाग (Stigma) पर लगा दें। एक बात का विशेष ध्यान रखें कि फूल का मादा भाग अधिक समय तक ग्रहणशील (Receptive) नहीं रह पाता है। अतः मादा भाग की ग्रहणशीलता देखने के लिए एक लैंस का इस्तेमाल करें और इस लैंस की सहायता से Stigma को देखें। यदि Stigma पर चित्रानुसार दर्शाई गयी हल्की पानी जैसी बूँदें नज़र आये तो इसका अर्थ यह हुआ कि Stigma ग्रहणशील अवस्था में है और उस पर परागकण डालने का उपयुक्त समय यही है।
इस विधि द्वारा की गयी Pollination से सैटिंग की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। यदि समय के अभाव में आप पूरे बागीचे में कृत्रिम रूप से परागकण विधि न अपना पायें तो कुछ पेड़ों में यह कर के देखें। कुछ समय बाद फलों से युक्त लदे पेड़ पारिणाम के रूप में आपके समक्ष होंगे।




