पिंक बड पर क्यों जरुरी है बोरोन
बसंत ऋतु के आते जैसे ही पौधों में रस चढ़ना शुरू होता है, सेब के बागीचों में बागवान भाइयों की चहलकदमी भी बढ़ जाती है | पिंक कली अवस्था में कीड़ों, बीमारियों और पोषक तत्वों के प्रबंधन पर ध्यान देना आवश्यक हो जाता है।
यदि हम पोषक तत्वों के सन्दर्भ में बात करें तो इसमें नाइट्रोजन, जिंक और बोरोन का अहम् योगदान रहता है। यूँ तो पौधे को बोरोन की आवश्यकता बहुत कम मात्रा में रहती है, लेकिन इसके महत्त्व को नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता।
पिंक कली अवस्था पर की गयी बोरोन की स्प्रे परागनली की बढ़ोतरी में सहायक होती है, परिणामस्वरूप सही निषेचन क्रिया के चलते, अच्छा फ्रूट सेट हो जाता है।
बोरोन को तौलिये की मिट्टी में भी मिश्रित किया जा सकता है, परन्तु यदि मिट्टी का pH मान अधिक हुआ तो यह बोरोन, मिट्टी में स्थित कैल्शियम के साथ गठबंधन कर लेता है पौधे को उपलब्ध नहीं हो पाता है। इसलिए पिंक कली अवस्था में बोरिक एसिड (250 ग्राम) प्रति 200 लीटर पानी में घोल कर स्प्रे करना लाभदायक रहता है। दूसरी स्प्रे पंखुड़ीपात अवस्था में की जानी चाहिए।
फ्रूट सेटिंग के अलावा बोरोन और भी बहुत से काम करता है जैसी कि पौधे में शर्करा को विभिन्न अंगों में पंहुचाने का कार्य, विभज्योतक (Meristem) गतिविधि को बढ़ावा देना इत्यादि। बोरोन की कमी से फलों में कोर्किंग और क्रैकिंग जैसे लक्षण सामने आते हैं। तुडान के पश्चात् की गयी बोरोन की स्प्रे आने वाले वर्ष में “फूलों को फल में परिवर्तित करने” के लिए लाभदायक रहती है। सर्दियों में पेड़ों की टहनियों में भंडारित यह बोरोन सीधा फूलों को पोषित करती है
बोरोन की अधिक मात्रा भी पौधे के लिए उतना ही नुकसानदायक है जितना कि इसकी कमी। इसलिए प्रति वर्ष 15 जुलाई से 15 अगस्त के मध्य पत्तों की जाँच अवश्य करवाएं।




