सचेत रहें, सतर्क रहें। स्कैब ने इस वर्ष फिर दस्तक दे दी है।
लगभग तीन दशक पूर्व हिमाचल में स्कैब नामक बीमारी ने विकराल रूप धारण कर लिया था। आज इतने लंबे समय बाद हिमाचल के कुछ क्षेत्रों में इस बीमारी ने फिर दस्तक दी है और काफी हद तक नुकसान कर रही है। आज हम स्कैब रोग के लक्षण और रोकथाम के बारे में चर्चा करेंगे।
सेब के पत्तों में शुरुआती हल्के पीले रंग के धब्बे नज़र आते हैं। फोटो में पत्तों और फलों पर दर्शाये गए लक्षणों को ध्यान से देखें, कहीं ऐसे लक्षण आपके बागीचे में तो नहीं ? अगर नज़र आ रहें हों तो सावधान हो जाएँ और बिना समय बर्बाद किए उचित कदम उठा लें। पत्तों पर आए धब्बे प्राइमरी इन्फ़ैकशन (Ascospore) के कारण होते हैं जब कि फलों पर सेकंडरी इन्फ़ैकशन (Conidia) आता है। जिससे फलों पर काले रंग के दाग पड़ जाते हैं। जिसमें छोटे छोटे पिन हेड नज़र आते हैं, परिणामस्वरूप फलों की मार्केट वेल्यू बहुत कम हो जाती है।
यदि समय रहते इस बीमारी को नियंत्रित न किया गया तो परिणाम भयंकर हो सकते हैं। इसकी रोकथाम के लिए Contaf 100 मिली लिटर अथवा Dodine 150 ग्राम पहली स्प्रे के रूप में तुरंत करें। इसके 12-15 दिनों बाद Cabriotop 300 ग्राम अथवा Diathane M-45 600 ग्राम की स्प्रे करें। दूसरी स्प्रे के 15 दिनों बाद Ziram 600 मिली लिटर अथवा Captan 600 ग्राम की स्प्रे करें। बारिश की संभावनाओं को देखते हुये स्प्रे के घोल में सिलिकॉन आधारित स्टिकर अवश्य डालें। ऊपर बताई गयी दवाई की मात्रा 200 लिटर पानी के हिसाब से छिड़काव करना है। अधिक नमी की स्थिति में डोडिन का छिड़काव न करें क्योंकि इससे कई बार पत्ते पीले पड़ जाते हैं।
चूंकि यह फफूंद पत्तों पर रह कर अपना जीवन चक्र पूरा करता है। इसलिए पतझड़ से पूर्व अक्तूबर माह के अंत में यूरिया 10 किलो ग्राम 200 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें। यदि पत्तियाँ गिर गयी हों तो उन्हें एकत्रित कर ज़मीन पर यूरिया की स्प्रे करें ताकि पतियाँ पूरी तरह सड़ जाएँ ।
बात यहीं खत्म नहीं होती, अगले वर्ष हरी काली अवस्था (मार्च) में डोडिन की स्प्रे अवश्य करें , क्योंकि यह फफूंद बसंत ऋतु में फैलना शुरू हो जाती है। थोड़ी से सावधानी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है।




