प्रूनिंग में इस्तेमाल होने वाले कट
आज कल प्रूनिंग का सीज़न ज़ोरों पर है| पेड़ों की कांट छांट करते वक़्त विभिन्न प्रकार के # कट मारे जाते हैं| यह जानना जरूरी है कि प्रूनिंग करते वक्त कौन सा कट कहाँ मारना है और कैसे ? गलत तरीके से की गई प्रूनिंग आपके वर्ष भर की मेहनत के ऊपर पानी फेर सकती है। आइये हम भी कुछ प्रूनिंग कट के बारे में जान लेते हैं :
- डच कट: इसे वीवील कट के नाम से भी जाना जाता है। इस कट का इस्तेमाल अक्सर उन जगहों पर किया जाता है जहां हमने मोटी टहनी को हटा कर बारीक टहनी लेनी हो। इस कट में हम तने के साथ टहनी का एक छोटा सा स्टंप छोड़ देते हैं। डच कट को मारने से, कट के नीचे से टहनी निकलती है जिसका क्रोच एंगल भी बड़ा होता है।
- फ्लश कट: इसमें टहनी को तने के बिल्कुल समीप से काटा जाता है। यह कट उन जगहों पर इस्तेमाल किया जाता है जहां हमें कोई भी टहनी नहीं लेनी हो। अक्सर thinning के लिये इसका उपयोग किया जाता है। इस प्रकार के कट को तने अथवा टहनी से बिल्कुल सटा कर न मारें। 2-3 mm का हिस्सा छोड़ दें। कट को एकदम सटा कर मारने से एक तो टहनी कमज़ोर पड़ जाती है दूसरे वहां पर कैंकर लगने की संभावनाएं बढ़ जाती है।
- नौचिंग: इसका इस्तेमाल नई टहनी निकलने में किया जाता है। अगर किसी जगह पर नई टहनी निकालनी हो तो इसका इस्तेमाल आंख (Bud) के ऊपर किया जाता है। इस कट को मारने के लिए hexa ब्लेड का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- स्कोरिंग: यदि किसी पेड़ में बीमे न बन रहे हों तो यह एक रामबाण तकनीक है। इसे रिंगिंग भी कहा जाता है। पेड़ के तने पर ज़मीन से लगभग 1 फुट की ऊंचाई पर इस कट को मारा जाता है। इसकी सम्पूर्ण जानकारी हमने इसी पेज पर अलग से दी है। जिसका लिंक इस लेख के अंत में दिया गया है।
- हेड बैक: इस कट में टहनी को बीच में काटा जाता है। अक्सर पेड़ की canopy को बढ़ाने के लिए इस कट का इस्तेमाल होता है। लेकिन जितना हेड बैक नीचे करेंगे उतनी ग्रोथ अधिक आती है और फसल देरी से लगती है।




