पुराने बागीचे में नये पौधे : [भाग-1]
समय के साथ पुराने बागीचे जैसे-जैसे खत्म होते जा रहें हैं, वैसे-वैसे हम बीमारी इत्यादि से ग्रसित पुराने पेड़ों को काट कर वहां नये पौधे लगाना शुरू कर देते हैं। लेकिन पुराने बागीचे की जगह नए पौधों को सफल बनाना चुनौतीपूर्ण रहता है। अक्सर देखा गया है कि पुराने बागीचों में पौधे अच्छे से ग्रोथ नहीं कर पाते हैं और बागवानों को निराशा हाथ लगती है। आइये आज हम कुछ ऐसे नुस्खों को जानने का प्रयास करेंगे, जिससे पुरानी जगहों पर भी हम नए पौधों को अच्छे से चला सकते हैं। पूराने बगीचों में नए पौधों का अच्छे से परफॉर्म न करने को SARD (Specific Apple Replantation Disease) बीमारी का नाम दिया गया है। अनुसंधान के आधार पर क्लोरोपिक्रिन को इसके लिए प्रभावशाली माना गया है। लेकिन भारत में इसकी उपलब्धता न होने के कारण हमें अन्य विकल्प तलाशने होंगे। पुरानी साइट पर M-793 रूटस्टॉक को एक बेहतर विकल्प माना गया है। जब कि M-9 को ऐसी साइटों पर न लगाने की सलाह दी जाती है।
इसके इलावा यदि गड्ढे में 1/2 किलो सफेद सरसों की खल को मिलाया जाए तो यह लाभप्रद रहता है। गढ्ढे में हाइड्रोजन पेरोक्साइड का इस्तेमाल एक बेहतरीन विकल्प माना गया है। हाइड्रोजन पेरोक्साइड स्पर्श करके कार्य करता है जो विभिन्न प्रकार के फफूंद, बैक्टीरिया आदि को निष्क्रिय कर देता है। इसके लिए जरूरी है कि मिट्टी को इस रसायन के घोल से अच्छे से सिंचित कर लिया जाये।
हाइड्रोजन पेरोक्साइड अत्यधिक अस्थिर (unstable) रहता है । अतः बागवान भाई Silver हाइड्रोजन पेरोक्साइड का इस्तेमाल करें। इसमें मौजूद Silver, इसके घोल को स्थिरता प्रदान करता है और फफूंद, बैक्टेरिया आदि के DNA में बदलाव कर उन्हें निष्क्रिय कर देता है। यह जरूरी है कि बागवान भाई अतिशीघ्र ही (30 मिनट के भीतर) इस घोल का इस्तेमाल कर लें अन्यथा आप इसके बेहतरीन परिणामों से वंचित रह जाएंगे।



