कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां
आज आपके साथ एक ऐसी बात सांझा करने जा रहा हूँ, जिसे लेकर बागवानों के मन में अक्सर दुविधा रहती है। आजकल प्रदेश भर में विभिन्न प्रगतिशील बागवानों द्वारा ट्रेनिंग व प्रूनिंग कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। इसी संदर्भ में एक किसान भाई का फोन आया, जिन्हें सेब की टहनी के एंगल के विषय में कुछ शंका हुई, कि टहनी को कितना झुकाना चाहिए और क्यों ?
प्राकृतिक रूप से सेब के पेड़ की टहनियां अक्सर सीधी आसमान की ओर बढ़ना शुरू हो जाती हैं। जिस टहनी ने ऊपर की तरफ ग्रोथ ले ली तो यकीन मानिए उसमें बहुत कम बीमे बनते हैं। क्योंकि पत्ते प्रकाश संश्लेषण विधि द्वारा जो कार्बोहाइड्रेट तैयार करते हैं, वह सीधा जड़ों में चले जाते हैं और टहनी में नाइट्रोजन की मात्रा अधिक होने के कारण उसका रुझान बजाय बीमे बनने के, ग्रोथ की तरफ अधिक रहता है। इसके विपरीत यदि टहनी को तने के साथ 90 डिग्री पर झुकाया जाए, तो टहनी में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा संचित हो जाती है जो बीमे बनने के काम आती है और अधिक फल लगते हैं। सलंग्न चित्र में यह स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।
टहनी और तने के बीच बने कोण को क्रोच एंगल कहा जाता है। यह क्रोच एंगल जितना संकरा होगा उतनी ही टहनी कमजोर होगी और उसके टूटने के आसार बहुत अधिक रहते हैं। इसलिए शुरुआती समय में टहनी को क्लॉथ पिन अथवा टूथपिक से 90 डिग्री के कोण पर झुका दें। कुछ समय बाद टहनी का अगला सिरा ऊपर की ओर आना शुरू करेगा, लेकिन तब तक आप का काम हो चुके होंगे और आपको इसकी चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
टहनियाँ फैलाने से एक तो कार्बोहाइड्रेट का पलायन जड़ों में नहीं होगा दूसरे पौधे के हर भाग तक सूर्य की रोशनी पहुंचेगी, जिससे अच्छी गुणवत्ता के फल लगते हैं । इसलिए भविष्य में टहनियां खड़ी रखने के बजाय उनके फैलाने पर ध्यान जरूर दें ।




